राजस्थान की प्रमूख नदियां

राजस्थान की प्रमूख नदियां

राजस्थान की प्रमूख नदियां


राजस्थान की प्रमूख नदियां


राजस्थान मे सर्वाधिक नदियों का उदगम अरावली पर्वतीय प्रदेष से होता है।

राजस्थान मे अरावली पर्वतमाला एक जल विभाजक के रूप मे कार्य करती है।

अरावली पर्वतमाला के पर्वू से निकलने वाली नदियो का पानी बंगाल की खाडी मे और पष्चिम से निकलने वाली नदियो का पानी अरब सागर मे गिरती है।

राजस्थान मे निम्न तीन प्रकार का अपवाह क्षेत्र पाया जाता है-

1ण् बगांल की खाडी मे गिरने वाली नदियों का अपवाह क्षेत्र-22.4प्रति.

2ण् अरब सागर मे गिरने वाली नदियो का अपवाह क्षेत्र-17.4प्रति.

3ण् आन्तिरक अपवाह क्षेत्र-60.2प्रति.

बगंाल की खाडी मे गिरने वाली नदियां

चम्बल नदी-

उपनाम- चर्मण्यवती,राजस्थान की कामधेनु, नित्यवाही।

उदगम स्थल - जनपाव की पहाडी(विन्धयाचल पर्वतमाला) महू छावनी के निकट जिला इन्दौर, मध्य प्रदेश।

कुल लम्बाई - 966 कि.मी.

कुल अपवाह क्षेत्र - 20.90प्रति.

चम्बल नदी मध्य प्रदेश राज्य मे बहती हुई चैरासीगढ कस्बे के निकट सर्वप्रथम राजस्थान के चितौडगढ जिले मे प्रवेश करती है तथा कोटा , बूंदी जिलो के मध्य बहती हुई सवाई माधोपुर जिले मे प्रवेश करती है और करौली , धौलपुर जिलो मे बहती हुई उतर प्रदेश के ईटावा जिले मे मुरादगंज कस्बे के निकट यमुना नदी मे अपना पानी गिराती है।

चम्बल राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच लगभग 241/252 कि.मी. लम्बी अन्तर्राज्यीय सीमा बनाती है।

चम्बल नदी अपवाह क्षेत्र की दृष्टि से राजस्थान की सबसे बडी नदी है इसका कुल अपवाह क्षेत्र 20.90प्रति. है।

राजस्थान मे सर्वाधिक सतही जल चम्बल नदी मे पाया जाता है।

राजस्थान मे चम्बल नदी सवाईमाधोपुर , करौली , धौलपुर , जिलो मे सर्वाधिक अवनालिका कटाव करती है जिसके कारण इन जिलो मे बीहड अथवा डांग क्षेत्र का निर्माण हो गया है।

राजस्थान मे सर्वाधिक बीहड भूमि धौलपुर जिलो मे पाई जाती है करौली को डंाग की रानी कहा जाता है।

चम्बल राजस्थान की एकमात्र नदी है जो कोटा व बूंदी जिलो के मध्य गार्ज तंग घाटी मे बहती है।

चम्बल नदी के उपर चितोडगढ जिले मे भैसरोडगढ के निकट चुलिया जल प्रपात बना हुआ है जिसकी        

        ऊँचाई     18मी. है।

चम्बल नदी के उपर चम्बल परियोजना के अन्तर्गत निम्न चार बांध स्थापित किये गये है-

1ण् गांधीसागर बांध - जिला मन्दसौर ,मध्य प्रदेष

2ण् राणा प्रताप सागर बांध - रावतभाटा तहसील , चितोडगढ

राणा प्रताप सागर बांध जल भराव क्षमता की दृष्टि से सबसे बडा बांध है।

3ण् जवाहर सागर बांध - बोरा बास, कोटा

4ण् कोटा बैराज - कोटा

इस बांध के निर्माण का मुख्य उदेष्य केवल सिचांई आपूर्ति करवाना है।

उपरोक्त चारो बांध चम्बल नदी के उपर 100कि.मी.के दायरे मे स्थापित किये गये है।

चम्बल परियोजना मे राजस्थान और मध्य प्रदेष की हिस्सेदारी 50ः50है।

चम्बल की सहायक नदी

बनास नदी -

उपनाम - वर्नाषा, वन की आषा, वषिष्टी।

उदगम स्थल -खमनौर की पहाडी , राजसमंद।

लम्बाई - 480 कि.मी.

अपवाह क्षेत्र - 9.80 प्रति.

बनास नदी राजसंमद , चितौडगढ , भीलवाडा ,अजमेर, टोंक जिलो मे बहती हुई सवाईमाधोपुर जिले के रामेष्वर कस्बे के निकट चम्बल मे मिल जाती है।

बनास नदी राजस्थान के अन्दर ही अन्दर बहने वाली सबसे लम्बी नदी है।

बनास चम्बल की सबसे लम्बी सहायक नदी है।

बनास नदी पर टोंक जिले मे बीसलपुर बांध बना हुआ है।

यह राजस्थान की सबसे बडी पेयजल योजना है। इस परियोजना मे टोंक , जयपुर, अजमेर जिले मे पेयजल सुविधा उपलब्ध करवाया जा रहा है।

सवाई माधोपुर जिले मे बनास नदी के उपर ईसरदा बांध बनाया जा रहा है।

बनास की सहायक नदियां-बेडच(आयड),मेनाल, कोठारी, खाडी , डाई बांडी, शाशी, मोरेल।

बेडच नदी:-

उदगम स्थल- गोगुन्दा की पहाडी , उदयपुर।

यह नदी उदयपुर ,चितौडगढ , जिलो मे बहती हुई भीलवाडा जिले की माडलगढ तहसील मे बीगौद गांव के निकट बनास मे मिल जाती है।

प्रारम्भ मे इसे आयड नदी कहते है परन्तु उदयसागर झील के पश्चात बेडच नाम से जाना जाता है।

आयड नदी के किनारे प्राचीन ताम्रयुगीन सभ्यता आहड सभ्यता के अवषेष प्राप्त हुए है।

बेडच की सहायक नदी गम्भीरी है जो चितौडगढ शहर के निकट बेडच मे मिल जाती है।

गम्भीरी और बेडच के संगम पर मेसा पठार स्थित है जिसके उपर चितौडगढ किला बना हुआ है।

मेनाल नदीः-

उदगम- बेंगू , चितौडगढ।

यह नदी चितौडगढ जिले मे बहती हुई भीलवाडा जिले मे बिगौद गांव के निकट बनास मे मिल जाती है।

कोठारी नदीः-

उदगम स्थल:- दिबेर की पहाडी ,राजसमंद

यह नदी राजसंमद जिले मे बहती हुई भीलवाडा जिले मे नन्दराय कस्बे के निकट बनास मे मिल जाती है। 

भीलवाडा जिले मे कोठारी के उपर मेजा बांध बना हुआ है।

खारी नदीः-

उदगम स्थल - बिजराल की पहाडी ,राजसमंद

यह नदी राजसमंद ,भीलवाडा ,अजमेर, जिलो मे बहती हुई टोंक जिलो मे देवली कस्बे के निकट बनास मे मिल जाती है।

डाई नदीः-

उदगम स्थल - नसीराबाद,अजमेर

यह नदी अजमेर जिले मे बहती हुई टोंक जिले के बीसलपुर गांव के निकट बनास मे मिल जाती है।

बनास व डाई नदी के सगंम पर बीसलपुर बांध बना हुआ है।

मासी नदीः-

उदगम स्थल - किष्नगढ,अजमेर

यह नदी अजमेर जिले मे बहती हुई टांेक शहर के निकट बनास मे मिल जाती है।

बांडी नदी:-

उदगम स्थल - आमलोद शामलोद की पहाडी ,जयपुर

यह नदी जयपुर जिले मे बहती हुई टांेक शहर के निकट बनास मे मिल जाती है।

मोरेल नदी:-

उदगम स्थल - चाकसू ,जयपुर

यह नदी जयपुर ,दौसा जिलो मे बहती हुई सवाईमाधोपुर जिले मे बनास मे मिल जाती है।

मोरेल की सहायक नदियांः-

ढूंढ और कालिसिलः-

ढूंढ नदी जयपुर जिले के अचरोल गांव से निकलकर दौसा जिले मे लालसोट कस्बे के निकट मोरेल मे मिल जाती है।

मोरेल की सहायक नदी कालिसिल करौली जिले के राजपुरा गांव से निकलकर सवाईमाधोपुर जिले मे मोरेल मे मिल जाती है।

चम्बल की ओर सहायक नदियां:-

मेज नदी:-

उदगम स्थल - मांठलगढ तहसील ,भीलवाडा

यह नदी भीलवाडा जिले मे बहती हुई बूंदी जिले मे चम्बल नदी मे मिल जाती है।

कुराल नदी:-

उदगम स्थल -उपरमाल का पठार

यह नदी बूंदी जिले मे बहती हुई चम्बल मे मिल जाती है।

बामनी नदी / ब्राह्मणी नदी:-

उदगम स्थल - हरीपुर गंाव , चितौडगढ

यह नदी चितौडगढ जिले मे बहती हुई भैसरोडगढ के निकट चम्बल मे मिल जाती है।

चम्बल व बामनी नदिंयो के सगंम पर राजस्थान का प्रसिद्ध जल दुर्ग भैसरोडगढ है।

कालीसिंध नदी:-

उदगम स्थल - बागली गांव ,जिला देवास ,मध्य प्रदेष

यह नदी मध्य प्रदेष से बहती हुई सर्वप्रथम झालावाड मे प्रवेष करती है तथा कोटा व बांरा जिलो के मध्य सीमा बनाते हुए कोटा जिले के नानेरा गांव के निकट चम्बल मे मिल जाती है।

कालीसिंध की सहायक नदिंया:-

आहू नदीः-

उदगम स्थल - सुसनेर तहसील,मध्यप्रदेष

यह नदी मध्यप्रदेष राज्य मे बहती हुई झालावाड जिले मे प्रवेष करती है और गागरोन के निकट कालीसिंध मे मिल जाती है।

आहू और कालीसिंध के सगंम पर गागरोन जल दुर्ग बना हुआ है।

परवन नदी -

उदगम स्थल - विध्यन की पहाडी , मध्यप्रदेष

यह नदी मध्य प्रदेष राज्य मे बहती हुई सर्वप्रथम झालावाड जिले मे प्रवेष करती है तथा बारां जिले की मागरोल तहसील के निकट कालीसिंध मे मिल जाती है।

बारां जिले मे परवन नदी के मध्य प्रसिद्ध जलदुर्ग शेरगढ बना हुआ है।

पार्वती नदीः-

उदगम स्थल - सेहोर, मध्यप्रदेष 

यह नदी बारां ,कोटा जिलो मे बहती हुई सवाईमाधोपुर के निकट चम्बल मे मिल जाती है।

पार्वती नदी राजस्थान मे बहने वाली चम्बल की सबसे पूर्वी सहायक नदी है।

पार्वती नदी कोटा जिला मे बहती हुई राजस्थान और मध्य प्रदेष के बीच अन्तर्राज्यीय सीमा बनाती है।

बाणगंगा नदी/अर्जुन की गंगा:-

उदगम स्थल - विराटनगर , जयपुर

यह नदी जयपुर , दौसा ,भरतपुर जिलो मे बहती हुई यह नदी उतरप्रदेष राज्य मे प्रवेष करती है और अन्त मे आगरा जिले मे फतीहाबाद कस्बे के निकट यमुना नदी मे अपना पानी गिराती है।

जयपुर जिले मे बाणगंगा नदी के उपर जमुआरामगढ बाध्ंा बना हुआ है।

गम्भीर नदी:-

उदगम स्थल - गंगापुर , सवाईमाधोपुर

यह नदी सवाईमाधोपुर करौली , धौलपुर और भरतपुर जिलो मे बहती हुई उतरप्रदेष राज्य मे प्रवेष करती है और अन्त मे आगरा के निकट यमुना नदी मे अपना पानी गिराती है।

गम्भीर की सहायक नदी पार्वती है जो कि धौलपुर ,करौली ,भरतपुर जिलो मे बहती है धौलपुर जिले मे पार्वती नदी के उपर बाध्ंा स्थापित किया गया है जिसे पार्वती सिचांई परियोजना कहते है।

गम्भीर नदी के उपर भरतपुर जिले मे अजान बांधबना हुआ है जिससे कैवलादेव अभयारण्य मे जल आपूर्ति करवाई जाती है।

अरब सागर मे गिरने वाली नदियांः-

लूणी/लवणवती नदी:-

उदगम स्थल - पुष्कर की पहाडी (नागपहाडी), अजमेर

कुल लम्बाई-495कि.मी.

राजस्थान के अन्दर ही अन्दर लम्बाई - 330कि.मी.

कुल अपवाह क्षेत्र- 10.40प्रति.

लूणी नदी का निर्माण अजमेर जिले मे सागरमती और सरस्वती जैसी जल धाराओ के मिलने से होता है लूणी नदी अजमेर , नागौर , पाली, जोधपुर, बाडमेर ,जालोर जिलो मे बहती हुई गुजरात राज्य मे प्रवेष करती है और अन्त मे कच्छ के रण मे अपना पानी गिराती है।

लूणी नदी अरावली के पष्चिम मे बहने वाली सबसे लम्बी नदी है लूणी नदी का पानी प्रारम्भ मे मीठा होता है परन्तु बालोतरा (बाडमेर) से आगे लवणीय मिटटी मे बहने के कारण इसका पानी खारा हो जाता है।

लूणी नदी के उपर जोधपुर जिले मे बीलाडा बांध बना हुआ है।

लूणी की सहायक नदियांः-

लीलडी, मीठडी, सूकडी, जोजडी, बांडी, सागाई, जबाई, गुहिया

जोजडी लूणी की एकमात्र सहायक नदी है जिसका उदगम अरावली से नही होता है।

लूणी की सहायक नदी बांडी राजस्थान की सबसे प्रदुषित नदी है।

पष्चिमी बनास:-

उदगम स्थल - सानवरा गांव , सिरोही 

यह नदी गुजरात राज्य मे बहती हुई कच्छ के रण मे अपना पानी गिराती है।

साबरमती नदी -

उदगम स्थल - पदराला गांव,उदयपुर

यह नदी उदयपुर जिले मे बहती ह ुई गुजरात राज्य मे प्रवेष करती है व अन्त मे खम्भात की खाडी मे अपना पानी गिराती हैै।

साबरमती नदी के किनारे गुजरात मे गांधीनगर और अहमदाबाद बस्से हुए है।

माही नदी/बागड की गंगा/काठंल की गंगा/आदिवासीयो की गंगा/ दक्षिणी राजस्थान की स्वर्ण रेखा -

उदगम - मेहद झील (धार की पहाडी) अममोरू गांव (मध्यप्रदेष)

कुल लम्बाई - 576कि.मी.

राजस्थान के अन्दर ही अन्दर- 171 कि.मी.

कुल अपवाह क्षेत्र - 4.80प्रति.

माही नदी मध्य प्रदेष राज्य मे बहती हुई राजस्थान मे सर्वप्रथम बांसवाडा जिले के खादु गांव के निकट प्रवेष करती है तथा डुगरपुर व बासंवाडा जिलो के मध्य सीमा बनाते हुए गुजरात राज्य मे प्रवेष करती है और अन्त मे खम्भात की खाडी मे अपना पानी गिराती है।

माही नदी विष्व की एकमात्र नदी है जो कर्क रेखा को दो बार काटती है।

माही ब्जाज सागर परियोजना के अन्तर्गत राजस्थान और गुजरात की हिस्सेदारी क्रमषः 45: 55 है।

माही ब्जाज सागर परियोजना के अन्तर्गत बांसवाडा जिले मे माही ब्जाज सागर और कागदी बांध तथा गुजरात राज्य मे कडाना बांध स्थापित किया गया है।

माही ब्जाज सागर बांध राजस्थान का सबसे लम्बा बांध है जिसकी लम्बाई 3109 मीटर है।

माही की सहायक नदियांः-

सोम, जाखम, अनास, चाप, एरन।

सोम नदीः-

उदगम - बीछामेडा की पहाडी ,उदयपुर

यह नदी उदयपुर जिले मे बहती हुई डंुगरपुर जिले के बेणेष्वर कस्बे के निकट माही मे मिल जाती है।

जाखम नदी -

उदगम - छोटी सादडी , प्रतापगढ

यह नदी प्रतापगढ ,उदयपुर जिलो मे बहती हुई बेणेष्वर के निकट माही मे मिल जाती है।

प्रतापगढ जिले के अनुपपुरा गंाव मे जाखम नदी के उपर जाखम बांध बना हुआ है यह राज्य का सबसे ऊँचा बांध है जिसकी ऊँचाई 81 मीटर है।

अन्तः प्रवाही नदियांः-

घग्घर नदी -

उदगम - कालका पहाडी , हिमाचल प्रदेष 

यह नदी हिमाचल, पंजाब, हरियाणा राज्यो मे बहती हुई राजस्थान मे सर्वप्रथम हनुमानगढ जिले की टिबी तहसील के निकट प्रवेष करती है तथा गंगानगर जिले मे बहती हुई पाकिस्तान के बहावलपुर जिले के  फोर्ट अब्बास मे विलुप्त हो जाती है।

पाकिस्तान मे घग्घर नदी को हकरा/वाहिद नाम से जाना जाता है।

घग्घर नदी प्राचीन सरस्वती नदी के मार्ग मे बहती है जो वर्तमान मे विलुप्त हो चुकी है इसलिए घग्घर नदी को मृत नदी कहते है।

घग्घर नदी के पाट को हनुमानगढजिले मे नाली कहा जाता है।

कालीबंगा सभ्यता का विकास घग्घर नदी के किनारे हुआ था।

साबी नदीः-

उदगम स्थल - सेवर की पहाडी ,जयपुर

यह नदी जयपुर , अलवर जिलो मे बहती हुई रेवाडी जिले मे प्रवेष करती है और अन्त मे गुडगांव जिले के पटौदी कस्बे के निकट विलुप्त हो जाती है।

रूपारेल नदी:-

उदगम स्थल - उदयनाथ की पहाडी, अलवर

यह नदी अलवर जिले मे बहती हुई भरतपुर जिले मे सीकरी कस्बे के पास विलुप्त हो जाती है।

कांतली नदीः-

उदगम स्थल - खण्डेला की पहाडी ,सीकर

यह नदी सीकर और झुन्झुनु जिलो मे बहती है ।

कांतली नदी के प्रवाह क्षेत्र को तोरावाटी कहते है।

कांतली नदी के किनारे प्राचीन ताम्रयुगीन सभ्यता गणेष्वर सभ्यता के अवषेष प्राप्त हुए है।

कांकणी नदी:-

उदगम स्थल - कोठारी गांव जैसलमेर

यह नदी जैसलमेर जिले मे ही बहती हुई बुझझील मे अपना पानी गिराती है स्थानीय लोग कांकणी नदी को मसूरदी नदी भी कहते है।

कांकणी नदी के किनारे राजकुमारी मूमल की मेढी बनी हुई है।

नदियांे से सम्बध्ंिात महत्पूर्ण जानकारी

राजस्थान मे सर्वाधिक नदियों वाला स्थान चितौडगढ

राजस्थान के बीकानेर और चुरू जिले मे कोई भी नदी नही बहती है।

सर्वाधिक नदियों वाला सम्भाग कोटा है।

सबसे कम नदियों वाला सम्भाग बीकानेर है।

राजस्थान के उदयपुर सम्भाग मे से निकलने वाली नदियां बगांल की खाडी और अरब सागर दोनो मे अपना पानी गिराती है।

राजस्थान मे वैदिक काल मे सरस्वती और दृश्द्धती नदी बहती थी जो वर्तमान काल मे विलुप्त हो चुकी है।

प्राचीन सरस्वती के मार्ग की खोज के लिए व्छळब्द्वारा प्रोजेक्ट सरस्वती चलाया जा रहा है।

राजस्थान सरकार द्वारा राज्य की निम्न 6 नदियो को आपस मे जोडकर इनके अतिरिक्त पानी को बीसलपुर बांध मे पहुचाया जाने की योजना ंहै।

चम्बल , बामनी, पीहू, मागंली, भीमलत, मेज

बूंदी जिले मे मागली नदी  के उपर राजस्थान का दुसरा सबसे ऊँचा जल प्रपात भीमताल जिसकी ऊँचाई 13मी. है।

राजस्थान मे निम्न प्रमुख त्रिवेणी सगंम 

रामेष्वर (सवाइ माधोपुर)- चम्बल , बनास , सीप

बेणेष्वर (डुगरपुर)- सोम , जाखम, माही

बीगौद (भीलवाडा)- बनास,बेडच, मेनाल

राजस्थान मे नदियो के किनारे बस्से हुए नगर

कोटा - चम्बल

झालावाड - कालीसिंध

चितोडगढ- बेेडच

उदयपुर - बेडच 

बालोतरा(बाडमेर)- लूणी नदी

सूमेरपुर (पाली)- जमाई 

भटनेर(हनुमानगढ)- घग्घर

आसिंद (भीलवाडा)- खारी