Arawali Parwat Mala अरावली पर्वतीय प्रदेश

अरावली पर्वतीय प्रदेश


अरावली पर्वतीय प्रदेश


अरावली पर्वतीय प्रदेश

अरावली पर्वतमाला राजस्थान के कुल भोगौलिक क्षेत्र के 9.3प्रति.भू भाग पर और राजस्थान के कुल 17 जिलो 

        मे फैली हुई है।

अरावली पर्वतमाला राजस्थान मे दक्षिण-पष्चिम से लेकर उतर-पूर्व की ओर विकण्वित फैली हुई है।

अरावली पर्वतमाला का उदगम प्री-केब्रियन काल मे हुआ था।

अरावली पर्वतमाला विष्व की प्राचीनतम वलित पर्वत  माला है वर्तमान मे अरावली एक अवष्ष्टि पर्वतमाला के         रुप मे विधमान है।

अरावली पर्वतमाला गोडवाना लैण्ड का हिस्सा है।

अरावली पर्वतमाला की उत्पति अरब सागर से हुई है इसीलिए अरब सागर को अरावली का पिता कहा जाता         है।

अरावली पर्वतमाला सर्वप्रथम राजस्थान मे सिरोही जिले से प्रवेष करती है।

अरावली पर्वतमाला का सर्वाधिक विस्तार व ऊंचाई दक्षिण-पष्चिम भागो मे पाई जाती है।

अरावली पर्वतमाला गुजरात राज्य मे खेडभ्रम(पालनपुर) से प्रारम्भ होकर राजस्थान , हरियाणा , राज्य होती             हुई अन्त मे दिल्ली के राय सिन्हा हिल्स तक जाती है।

अरावली पर्वतमाला की कुल लम्बाई 692 कि.मी. है।

राजस्थान मे अरावली पर्वतमाला माउण्ट आबू (सिरोही) से झुन्झुनु जिले के खेतडी कस्बे तक 550 कि.मी.             फैली हुई है जो कि अरावली के कुल लम्बाई का लगभग 80प्रति. है।

राजस्थान मे अरावली पर्वतमाला का सर्वाधिक विस्तार उदयपुर जिले मे तथा सबसे कम अजमेर जिले मे पाया         जाता है।

राजस्थान मे अरावली पर्वतमाला की सर्वाधिक ऊंचाई सिरोही जिले मे पाई जाती है।

        अरावली की प्रमुख चोटीयां

गुरुषिखर    सिरोही       1722 मी.

गुरुषिखर चोटी के उपर भगवान दतात्रेय का मन्दिर बना हुआ है।

कर्नल जेम्स टॅाड ने गुरुषिखर को संतो का षिखर कहां था।

उतर भारत मे हिमालय और दक्षिण भारत मे नीलगीरी के मध्य भारत की सबसे ऊंची चोटी गुरुषिखर है।

सेर         सिरोही      1597मी.

जरगा       उदयपुर      1431मी.

अचलंगढ     सिरोही      1380मी. 


मध्य अरावली की सबसे ऊंची चोटी तारागढ(अजमेर) 873मी. है।

उतरी अरावली की सबसे ऊंची चोटी रघुनाथगढ(सीकर) 1055मी. है।

अरावली पर्वतमाला की औसत ऊंचाई 930मी. है।

अरावली पर्वतमाला पश्चिमी रेतीले मैदान को पूर्व की ओर बढने से रोकती है।

राजस्थान मे अरावली पर्वतमाला बंगाल की खाडी से आने वाली मानसूनी पवनो से वर्षा कराने मे सहायक है जबकि कच्छ की खाडी से आने वाली मानसूनी पवने अरावली के समान्तर सीधी निकल जाती है इसीलिए अरावली पर्वतमाला कच्छ की खाडी से आने वाली मानसूनी पवनो से वर्षा कराने मे सक्षम नही है।

राजस्थान मे अरावली पर्वतमाला से सर्वाधिक नदियो का उदगम होता है।

अरावली पर्वतमाला राजस्थान मे जल विभाजक का कार्य करती है इसके पूर्व से निकलने वाली नदियो का पानी बंगाल की खाडी मे और पश्चिम से निकलने वाली नदियो का पानी अरब सागर मे मिलता है।

राजस्थान मे सर्वाधिक कृत्रिम झीले ओर बांध अरावली पर्वतीय प्रदेश मे स्थित है।

राजस्थान मे सर्वाधिक वन अरावली पर्वतीय प्रदेश मे पाये जाते है इसीलिए राजस्थान मे सर्वाधिक अभयारण्य क्षेत्र भी अरावली पर्वतीय प्रदेश मे पाये जाते है।

अरावली पर्वतमाला के दक्षिणी भागो मे भील, मीणा, गरासिया , डामोर, कथोडी जैसी जनजातियां पाई जाती है ये लोग अरावली के दक्षिणी भागो मे पर्वतीय क्षेत्रो मे स्थानान्तरीय कृषि करते है जिसे वालरा या चिमाता कहते है।

राजस्थान मे अरावली को खनिजो का अजायबघर कहा जाता है।

अरावली पर्वतमाला के मध्य मे पाये जाने वाले दर्रो को नाल कहते है।

राजस्थान मे निम्न नाल प्रसिद्ध है-

सांभर नाल - जयपुर

देसी नाल - पाली

बर - पाली

बर दर्रे से छभ् दृ 14 गुजरता है।


राजस्थान की अन्य प्रमुख पर्वत और चैटीयां

मालखेत की पहाडी - सीकर

हर्ष की पहाडी - सीकर 

मालाणी पर्वत - बाडमेर

सुंधा पर्वत - जालोर

जसवंतपुरा की पहाडियां - जालोर - सिरोही

छप्पन की पहाडियां - बाडमेर/ नाकोडा पर्वत

राजस्थान का पूर्वी मैदानी भाग

यह राजस्थान के कुल भोगोलिक क्षेत्रफल का 23.3 प्रति. है।

इस मैदान का निर्माण चम्बल, बनास, माही, और बाणगंगा जैसी नदीयो से हुआ है इस मैदानी भाग मे                    उपजाऊ जमीन तथा पानी की उपलब्धता के कारण यहंा सर्वाधिक जनसख्ंया घनत्व पाया जाता है।

इस मैदान का ढलान उतर - पूर्व की ओर है।

दक्षिणी - पष्चिम हाडौती पठार

यह पठार राजस्थान के कुल भोगोलिक क्षेत्रफल का 6.3 प्रति. भू भाग पर फैला हुआ है।

इस पठार का विस्तार राजस्थान मे कोटा,बूंदी, बारां और झालावाडा जिलो मे पाया जाता है।

हाडौती का पठार भारत के दक्कन के पठार अथवा प्रायद्वीपीय पठार का उतरी हिस्सा है।

ंइस क्षेत्र का निर्माण ज्वालामुखी लावा के जमने से हुआ है इसीलिए हाडौती का धरातल पथरीला व चटटानी         है।

हाडौती क्षेत्र मे काली मिटटी का प्रसार पाया जाता है इस मिटटी का निर्माण ज्वालामुखी लावा के अपक्षय -             अपरदन से हुआ है।

हाडौती क्षेत्र मे धरातल पथरीला व चटटानयुक्त होने के कारण कुअंा खोदना, नहरे निकालना सम्भवं नही है         इसीलिए यहां तालाबो द्वारा सर्वाधिक सिंचाई किया जाता है।

हाडौती अरावली और विन्धयाचल पर्वतमालाओ के मध्य सक्रंाति प्रदेष कहलाता है।

ग्रेट बाउण्ड्री फॅाल्ट(ब्रहत सीमांत क्षेत्र) राजस्थान मे बूंदी और सवाईमाधोपुर जिलो के मध्य से गुजरती है।

हाडौती क्षेत्र का ढलान दक्षिण से उतर की ओर है।